और मैं उस हवाई जंगल में जा गिरा। जहाँ नीचे ऊपर है, और ऊपर नीचे। वहाँ मैंने सीखा—गिरना भी एक दिशा है। बस तुम्हारे उपमान की गुरुत्वाकर्षण शक्ति चाहिए।
तुम कहो 'बादल'... और मैं बरसने को तैयार। बिना छतरे के, बिना पूर्वसूचना के। सिर्फ एक उपमान के भरोसे। This piece explores the idea of being so deeply influenced by someone’s poetic way of speaking (their similes) that you literally "fall" into those images—becoming the well, the stitch, the upside-down tree. The speaker loses literal reality and surrenders to the gravitational pull of the beloved’s metaphors, finding freedom not in standing still but in falling endlessly through their language.
दूसरी बार तुमने कहा— "तुम्हारा स्पर्श बिना सुई के सीने जैसा है।" falling into your simile in hindi
गिरना सीख लिया है मैंने। गिरकर भी न उठने की कला। क्योंकि तुम्हारे हर उपमान में एक नया क्षितिज है, एक नई तह। और मैं अब उस तह में घर कर गया हूँ।
तुमने पहली बार कहा— "तेरी आँखें गहरे पानी के कुएँ हैं।" केवल डिज़ाइन दिखे।
तीसरी बार तुम चुप थीं। लेकिन तुम्हारी चुप्पी ने कहा— "हम दो ऐसे पेड़ हैं, जिनकी जड़ें ज़मीन से बाहर बढ़ रही हैं।"
और मैं उसी पल उस कुएँ में गिर गया। कोई रस्सी नहीं थी, कोई दीवार नहीं। बस अंधेरा था—मीठा, नम, और अंतहीन। नीचे गिरते हुए मैंने सोचा, यह उपमान तो खतरनाक है। तुमने मेरी आँखों को 'कुआँ' कहकर मुझे ही उनमें डुबो दिया। falling into your simile in hindi
और मैं उस सिलाई में फँस गया। धागा मेरी उँगलियों से बँधता गया, और शरीर की हर तह पर एक अदृश्य कढ़ाई उभर आई। तुम मुझे 'बिना सुई का सीना' सिखा रही थी। यानी दर्द को ऐसे बुनना कि छेद न दिखे, केवल डिज़ाइन दिखे।