इतने सारे पेंगुइन्स को संभालना मुश्किल हो जाता है। घर छोटा है, खाने पर बजट बिगड़ रहा है और पेंगुइन्स की शैतानियां बढ़ती जा रही हैं। श्रीमान पॉपर को पता चलता है कि ये पेंगुइन सिर्फ पालतू जानवर नहीं हैं, बल्कि बहुत होशियार हैं – वे तो सर्कस (circus) के शो कर सकते हैं!
बच्चों की साहित्य की दुनिया में कुछ किताबें ऐसी हैं जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी बच्चों का दिल जीतती रही हों। 'मिस्टर पॉपर के पेंगुइन' (Mr. Popper's Penguins) उन्हीं में से एक है। यह किताब, जिसे रिचर्ड और फ्लोरेंस एटवाटर (Richard and Florence Atwater) ने लिखा है, सन् 1938 में प्रकाशित हुई थी, लेकिन आज भी उतनी ही ताजा और मजेदार लगती है। आइए जानते हैं इस अनोखी कहानी के बारे में। mr. popper's penguins in hindi
इस कहानी पर 2011 में जिम कैरी (Jim Carrey) की मुख्य भूमिका वाली एक हॉलीवुड फिल्म भी बनी। फिल्म काफी मजेदार थी, लेकिन किताब में कहानी कुछ अलग है। किताब ज्यादा सरल, प्यारी और परिवारिक है, जबकि फिल्म में आधुनिक ट्विस्ट हैं। हालांकि, दोनों ही बेहतरीन हैं। प्यारी और परिवारिक है
एक दिन उनकी जिंदगी में ट्विस्ट आता है। उन्हें एडमिरल ड्रेक (Admiral Drake) नाम के एक एक्सप्लोरर से एक पेंगुइन (penguin) उपहार में मिलता है। पेंगुइन का नाम वे रखते हैं – । mr. popper's penguins in hindi
कहानी है श्रीमान पॉपर (Mr. Popper) की, जो एक साधारण चित्रकार (house painter) हैं। वे एक छोटे से शहर में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं। श्रीमान पॉपर की एक खासियत है – उन्हें दूर-दराज के इलाकों की खोज और ध्रुवों (Poles) की यात्राओं के बारे में पढ़ना बहुत पसंद है। उनका सपना है कि काश वे भी कभी एक्सप्लोरर (explorer) बन पाते।