Structural Unemployment In Hindi ❲Ultimate❳

बाबूराम ने सीखना शुरू किया। उसकी उँगलियाँ, जो कभी रेशम संवारती थीं, अब कीबोर्ड पर चलने लगीं। उसने सीखा कि ऑटो-लूम को कैसे सेट करना है, कैसे डिज़ाइन अपलोड करने हैं।

एक दिन शहर से एक बड़ी कंपनी के लोग आए। उनके पास था "ऑटो-लूम" - एक ऐसी मशीन जो दिन-रात चलती, कभी थकती नहीं, और एक मिनट में उतना कपड़ा बुन देती जितना बाबूराम पूरे दिन में बुनता। structural unemployment in hindi

कहानी का सीख:

आज कोल्हापुरी गेट में कोई बेरोज़गार नहीं है। वहाँ अब "हैंडलूम म्यूज़ियम" है - बाबूराम के पुराने करघे के साथ। और साथ में एक मॉडर्न ट्रेनिंग सेंटर, जहाँ बूढ़े बुनकर जवानों को नई टेक्नोलॉजी सिखाते हैं। कभी थकती नहीं

। यह वो बेरोज़गारी है जो तब होती है जब बाजार की मांग बदल जाती है, टेक्नोलॉजी बदल जाती है, लेकिन लोगों के कौशल नहीं बदल पाते। नौकरियाँ हैं, पर उन नौकरियों के लिए लोगों के पास सही स्किल नहीं है। टेक्नोलॉजी बदल जाती है

एक साल बाद, वही कंपनी जिसने उसे नौकरी से ठुकराया था, अब उसे "टेक्निकल सुपरवाइजर" के पद पर ले गई। बाबूराम अब पुराने बुनकरों को नई मशीनें सिखाता।

बाबूराम ने महसूस किया कि उसकी करघे की कला अब "डायनासोर" बन चुकी है - खूबसूरत, पर विलुप्त होती।

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